Dharmendra Pradhan Resigns: NEET विवाद के बीच देश के शिक्षा मंत्री ने छोड़ा पद

Dharmendra Pradhan Resigns

Dharmendra Pradhan Resigns- केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनका इस्तीफा पिछले कुछ हफ्तों से चल रहे NEET-UG परीक्षा विवाद, पेपर लीक के आरोपों और देशभर में हो रहे छात्र प्रदर्शनों के बीच आया है।

अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि उन्होंने छात्रों के भविष्य और देशहित को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया है। उन्होंने यह भी कहा कि वे नहीं चाहते कि मौजूदा स्थिति का गलत फायदा उठाया जाए और छात्रों का भविष्य प्रभावित हो।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब सभी की नजर इस बात पर है कि केंद्र सरकार अगला शिक्षा मंत्री किसे नियुक्त करती है और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए क्या बड़े कदम उठाए जाते हैं। इस घटनाक्रम को देश की शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटना माना जा रहा है।

धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दिया, NEET विवाद के बीच बड़ी खबर
NEET विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

NEET पेपर लीक मामले में अब तक 13 की गिरफ़्तारी

3 मई 2026 को हुई NEET-UG 2026 परीक्षा का पेपर लीक हुआ। सरकार और NTA ने NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द कर दी और दोबारा परीक्षा कराई। इस दौरान देशभर में कई छात्रों ने सुसाइड किया।
फिलहाल मामले की जांच CBI कर रही है। इसमें महाराष्ट्र, राजस्थान, दिल्ली समेत कई राज्यों में पड़ताल हुई। अब तक 13 आरोपी पकड़े गए हैं। CBI जल्द ही इस चार्जशीट फाइल कर सकती है।

मौजूदा पेपर लीक रोकने का कानून, 4 पॉइंट

  • जून 2024 तक पेपर लीक के लिए कोई एक सेंट्रल कानून नहीं था। धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और जालसाजी जैसी धाराओं में मुकदमा दर्ज होता था। इनमें जमानत की कोई सख्त शर्तें नहीं हैं।
  • कुछ राज्यों ने अलग से नकल-विरोधी भी कानून बनाए, मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट भी शामिल किया। उत्तर प्रदेश में कुछ मामलों में गैंगस्टर एक्ट भी लगाया गया।
  • NEET-UG और UGC के एग्जाम में धांधली के बाद 21 जून 2024 को केंद्र सरकार ने सार्वजानिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम लागू किया। इसमें पेपर लीक, मदद करना, गलत तरीके से OMR शीट हासिल करना, नकल करवाना, एग्जाम से जुड़ी फर्जी वेबसाइट बनाने या परीक्षक को धमकी को सजा के दायरे लाया गया।
  • ये सभी अपराध गैर-जमानती हैं, इनमें दो कैटेगरी में सजा का प्रावधान है। पहला- पेपर लीक वगैरह करने पर 3 से 5 साल की सजा और 10 लाख तक का जुर्माना हो सकता है। दूसरा- एग्जाम करवाने वाली संस्था या एजेंसी के डायरेक्टर या मैनेजमेंट के ऑफिसर्स ने कोई अपराध किया, तो 3 से 10 साल तक की जेल और एक करोड़ का जुर्माना हो सकता है।

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